नशीली दवाओं के कारोबार पर लगाम के लिए सरकार ने बढ़ाई सख्ती
गोरखपुर।
दवाओं की थोक बिक्री (होलसेल ड्रग) के लाइसेंस की प्रक्रिया को सरकार ने पहले से अधिक सख्त और जटिल बना दिया है। नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने लाइसेंस से जुड़ी गाइडलाइंस को कड़ा कर दिया है।
अब होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों को पहले की तुलना में अधिक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। नए नियमों के तहत आवेदक को पिछले तीन वर्षों के व्यवसाय का रिकॉर्ड, साथ ही शपथ पत्र (एफिडेविट) देना अनिवार्य कर दिया गया है।
अनुभव प्रमाण पत्र की होगी सख्त जांच
सरकार ने थोक दवा दुकानदारों के अनुभव को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है। आमतौर पर अधिकांश आवेदक किसी अन्य थोक दवा फर्म से अनुभव प्रमाण पत्र लगाते हैं, लेकिन अब ऐसे प्रमाण पत्रों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
इस सत्यापन की जिम्मेदारी सीधे ड्रग इंस्पेक्टर को दी गई है। ड्रग इंस्पेक्टर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली फर्म में जाकर मौके पर जांच करेंगे, ताकि फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाई जा सके।
दुकान परिसर की पूरी जानकारी होगी अपलोड
नई गाइडलाइंस के अनुसार, लाइसेंस आवेदन के समय प्रस्तावित थोक दवा दुकान से जुड़ी कई जानकारियां ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसमें शामिल हैं—
- औषधि भंडारण की व्यवस्था
- रेफ्रिजरेटर या कोल्ड रूम की सुविधा
- बिजली की उचित व्यवस्था
- दुकान का साइन बोर्ड
- आसपास की दुकानों की तस्वीरें
कम्पीटेंट पर्सन के दस्तावेज भी होंगे सत्यापित
थोक दवा दुकान में कार्यरत कम्पीटेंट व्यक्ति के अनुभव प्रमाण पत्र के साथ-साथ अब
- वेतन भुगतान का रिकॉर्ड
- हाजिरी रजिस्टर
- अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली फर्म का लाइसेंस
का भी सत्यापन किया जाएगा।
प्रशासन का उद्देश्य
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इन सख्त नियमों का मुख्य उद्देश्य नशीली और नियंत्रित दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना और दवा कारोबार में पारदर्शिता लाना है। नई व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों और अवैध दवा कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
Discover more from Hata Times (हिन्दी न्यूज़ पोर्टल)
Subscribe to get the latest posts sent to your email.