विकास खंड देसही देवरिया के छोटे से गांव गौनरिया (रामपुर गौनरिया) में रहने वाली सुधा मिश्रा और उनके परिवार के लिए यह खुशी का मौका है। सुधा मिश्रा, जो एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं, ने अपने छोटे बेटे रूपक कुमार मिश्रा के उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर के पद पर चयन की खबर से पूरे गांव का मान बढ़ा दिया है।

रूपक मिश्रा, जे.ई.

बचपन मे खोया पिता का साया

रूपक की इस कामयाबी की कहानी इतनी सरल नहीं है। जब रूपक बहुत छोटे थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। पिता गौरी शंकर मिश्रा, जो पेशे से एक वकील थे, ने अपने बच्चों के लिए बड़े सपने देखे थे। पिता की मृत्यु के बाद, रूपक और उनके बड़े भाई दीपक की जिम्मेदारी मां सुधा मिश्रा पर आ गई। सुधा ने बिना हार माने अपने बच्चों की परवरिश की और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए अथक परिश्रम किया।

सुधा मिश्रा ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए अपने बड़े बेटे दीपक को शिक्षक बनने में मदद की, जबकि छोटे बेटे रूपक को एक इंजीनियर बनाने का सपना देखा। सुधा की कड़ी मेहनत और त्याग ने ही रूपक को आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

माँ और बड़े भाई को दिया सफलता का श्रेय

रूपक ने भी इस सफलता को सिर्फ अपने संघर्ष का नतीजा नहीं माना, बल्कि इसे अपनी मां, बड़े भाई दीपक और परिवार के अन्य सदस्यों, मित्रों और रिश्तेदारों की प्रेरणा और समर्थन का परिणाम बताया। उनका कहना है कि उनकी मां ने जिस हिम्मत और धैर्य के साथ कठिन समय में उनका साथ दिया, वह हमेशा उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहेगी।

गांव के लिए मिशाल बनें रूपक

रूपक मिश्रा की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे गांव के लिए भी एक मिसाल है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, संकल्प और परिवार का समर्थन किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। गांव के लोग रूपक की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।

रूपक की यह सफलता न सिर्फ उनके पिता के सपने को साकार करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मां का त्याग और संकल्प किसी भी बच्चे को ऊंचाई तक पहुंचा सकता है। रूपक की यह यात्रा आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।


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One thought on “आंगनबाड़ी कार्यकत्री का बेटा हुआ जे.ई.”

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