भारत में उपराष्ट्रपति का पद बेहद महत्वपूर्ण constitutional post (संवैधानिक पद) है। उपराष्ट्रपति न केवल उच्च पदस्थ संवैधानिक पदाधिकारी हैं, बल्कि राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि आखिर भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव प्रक्रिया क्या है।

उपराष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है?
- उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – के सभी सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है।
- राष्ट्रपति चुनाव से अलग, इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते।
- यानी केवल सांसद (MPs) ही उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
चुनाव की प्रणाली (Proportional Representation)
उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) से कराया जाता है। इसमें:
- प्रत्येक सांसद उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता क्रम (Preference Order) में वोट करता है।
- मतदाता केवल एक उम्मीदवार का नाम नहीं लिखता, बल्कि 1, 2, 3 की तरह प्राथमिकताएँ अंकित करता है।
एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote)
- यदि किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता (First Preference) के बहुमत मत नहीं मिलते हैं, तो सबसे कम प्रथम वरीयता पाने वाले उम्मीदवार के वोट अगले वरीयता क्रम में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
- यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है, जब तक कोई उम्मीदवार आवश्यक कोटा (Quota) हासिल नहीं कर लेता।
- इस प्रणाली से सुनिश्चित होता है कि निर्वाचित उपराष्ट्रपति को व्यापक समर्थन प्राप्त हो।
गुप्त मतदान (Secret Ballot)
- उपराष्ट्रपति चुनाव गुप्त मतदान (Secret Ballot) से होता है।
- मतदान की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।
- सांसद अपने मतपत्र को किसी को दिखा नहीं सकते।
- खुले मतदान (Open Ballot) की कोई व्यवस्था इस चुनाव में लागू नहीं होती।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रक्रिया?
- गुप्त मतदान और एकल हस्तांतरणीय मत जैसी प्रणालियाँ उपराष्ट्रपति चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाती हैं।
- इससे सुनिश्चित होता है कि निर्वाचित उम्मीदवार संसद के व्यापक समर्थन से चुना जाए।
निष्कर्ष
भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव प्रक्रिया अनूठा संवैधानिक और लोकतांत्रिक है, जिसमें केवल संसद सदस्य ही भाग लेते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और गुप्त मतदान जैसी विधियों से सम्पन्न होता है ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
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