कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में शवों को संभालने वाले सहायक (डोम) के छह पदों के लिए 8000 से अधिक आवेदन आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन करने वालों में बड़ी संख्या में इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट उम्मीदवार भी शामिल हैं। जबकि इन पदों के लिए न्यूनतम योग्यता 8वीं पास और आयु 18 से 42 वर्ष निर्धारित की गई थी।

आवेदकों में 100 इंजीनियर और 500 पोस्ट ग्रेजुएट:
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इन पदों के लिए 1 अगस्त को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इन पदों के लिए मासिक वेतन 15 हजार रुपये निर्धारित है। नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि, “आवेदकों में से 100 इंजीनियर, 500 पोस्ट ग्रेजुएट और 2200 ग्रेजुएट हैं। इनमें से 784 उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया है, जिनमें 84 महिलाएं भी शामिल हैं।”
अधिकारी ने कहा, “यह पहली बार है जब हमने डोम के पदों के लिए इतने अधिक उच्च शिक्षित लोगों को आवेदन करते हुए देखा है। आमतौर पर, इन पदों के लिए आवेदन करने वाले लोग वही होते हैं जिनके परिवार के सदस्य पहले से ही इस काम में लगे होते हैं।”
बेरोजगारी का असर:
यह घटना पश्चिम बंगाल में बढ़ती बेरोजगारी की ओर इशारा करती है। शिक्षित युवाओं को कम वेतन वाले मैनुअल काम के लिए भी आवेदन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
यह घटना हमें शिक्षा प्रणाली और रोजगार के अवसरों के बीच बढ़ते अंतर पर भी सवाल उठाती है। क्या हमारी शिक्षा प्रणाली युवाओं को उन कौशलों से लैस कर रही है जिनकी उन्हें वास्तव में नौकरी बाजार में सफल होने के लिए आवश्यकता होती है?
इस घटना पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि शिक्षित युवाओं को कम वेतन वाले मैनुअल काम के लिए आवेदन करना चाहिए?
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