हाटा कोतवाली क्षेत्र के पगरा गांव में मंगलवार देर रात एक भयावह घटना घटी, जिसने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया। विवाद का कारण झाड़-फूंक था, जिसकी वजह से दो देवरानियों और जेठानी के बीच पहले से चल रहे तनाव ने विकराल रूप ले लिया। इस विवाद का शिकार बना चार वर्षीय मासूम रूपेश, जिस पर उसकी चाची ने छुरे से हमला कर दिया।

झगड़े की शुरुआत
रामानंद चौहान के तीन बेटे हैं और उनके परिवार में अक्सर छोटी-मोटी बातों पर झगड़े होते रहते थे। मंगलवार की रात को भी कुछ ऐसा ही हुआ जब बड़े बेटे बृजभान की पत्नी गंगू देवी और दो देवरानियां—उदयभान की पत्नी पुनीता और उपेंद्र की पत्नी झीमा—आपस में झाड़-फूंक का आरोप लगाने लगीं। पहले तो बात केवल कहासुनी तक सीमित थी, लेकिन जल्द ही यह विवाद मारपीट में बदल गया।
मासूम पर हुआ हमला
झगड़ा बढ़ने पर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बृजभान के चार वर्षीय बेटे रूपेश को इसका शिकार बनना पड़ा। बृजभान का आरोप है कि इस दौरान उनके पिता रामानंद और मां बरसाती देवी ने झीमा को उकसाया, जिसके बाद झीमा ने गुस्से में आकर घर में रखे छुरे से मासूम रूपेश पर हमला कर दिया। रूपेश को कई गंभीर चोटें आईं और वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा।
बच्चे की हालत नाजुक
बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए परिजन तुरंत उसे नजदीकी सीएचसी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे की स्थिति चिंताजनक है और उसे अभी भी खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता।
पुलिस की कार्रवाई
इस घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बृजभान की तहरीर पर रामानंद, बरसाती देवी, झीमा और पुनीता के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया। सीओ कुंदन सिंह ने बताया कि आरोपी सास-ससुर यानी रामानंद और बरसाती देवी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास और पारिवारिक झगड़ों के घातक परिणामों की ओर इशारा करती है। इस तरह की घटनाओं से न केवल परिवार बल्कि मासूम बच्चों की भी जान खतरे में पड़ जाती है। यह समय है जब हमें समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि अंधविश्वास और अविवेकपूर्ण क्रियाओं से बचा जा सके।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक मासूम की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है, और यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक हम झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों के चक्कर में अपनी और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालते रहेंगे?
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