रामकोला: रामकोला थाना क्षेत्र के चंदरपुर लछिया गांव निवासी दीपक कुमार की मां दुर्गावती देवी (55 वर्ष) की पथरी के ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर की लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

ऑपरेशन के बाद भी पेट में दर्द
दुर्गावती देवी को 8 जून 2023 को पेट में दर्द होने पर रामकोला के साईं हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने जांच के बाद पित्त की थैली में पथरी होने की पुष्टि की और ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों की सहमति के बाद ऑपरेशन कर दिया गया। 14 जून को दुर्गावती देवी को डिस्चार्ज कर दिया गया। घर आने के बाद भी उन्हें पेट में दर्द होने लगा।
दूसरे अस्पताल में पित्त की थैली मिली
डॉक्टर ने उन्हें गोरखपुर एम्स रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लखनऊ एसजीपीजीआई ले गए, जहां पता चला कि ऑपरेशन के दौरान सिर्फ पेट में चीरा लगाया गया है और पित्त की थैली नहीं निकाली गई है। इसके लिए 13000 रुपये भी जमा कराए गए थे। अधिक दर्द होने और चीरा संक्रमित होने से दुर्गावती देवी की मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पित्त की थैली नहीं निकलने की पुष्टि
शिकायत पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पित्त की थैली नहीं निकलने की पुष्टि हुई। परिजनों ने डॉक्टर पर गैर इरादतन हत्या और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने साईं हॉस्पिटल के संचालक डॉ. महेंद्र कुशवाहा पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसओ विनय कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
क्या है पित्त की थैली में पथरी?
पित्त की थैली में पथरी एक आम समस्या है। इसमें पित्त की थैली में पथरी बन जाती है, जिससे पेट में दर्द, मतली और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पथरी के आकार और स्थान के आधार पर इसका इलाज दवाओं या ऑपरेशन द्वारा किया जाता है।
डॉक्टर की लापरवाही के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
डॉक्टर की लापरवाही के कारण मरीज की मौत होने पर मृतक के परिजन भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। इस धारा के तहत लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर को 7 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
मरीजों को जागरूकता
यह घटना मरीजों के लिए एक सबक है। किसी भी तरह के इलाज से पहले मरीज को डॉक्टर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। ऑपरेशन जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले दूसरी राय लेना भी बेहतर होता है।
इस घटना से निम्नलिखित सवाल उठते हैं:
- क्या डॉक्टर ने मरीज को ऑपरेशन की पूरी जानकारी दी थी?
- क्या ऑपरेशन के लिए मरीज की सहमति ली गई थी?
- क्या ऑपरेशन सही तरीके से किया गया था?
- क्या अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण के लिए उचित प्रबंध थे?
यह घटना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लापरवाही की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डालती है। आप इस घटना पर अपनी राय कमेंट सेक्शन में रख सकते हैं।
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