मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों में वायरल फीवर के बाद डायरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कुशीनगर जिले के मेडिकल कॉलेज का चाइल्ड वार्ड पूरी तरह से भर चुका है। 28 बेड वाले इस वार्ड में 40 से अधिक बच्चों को भर्ती किया गया है, जिससे एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। डॉक्टर न केवल इलाज कर रहे हैं बल्कि बचाव के लिए भी सुझाव दे रहे हैं।

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में आठ वर्ष तक के बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चों के खानपान पर ध्यान दें और किसी भी समस्या की स्थिति में लापरवाही न करें, बल्कि तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। उमस भरी गर्मी बच्चों की सेहत पर विपरीत असर डाल रही है, जिससे बड़ी संख्या में बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। निजी अस्पताल भी मरीजों से खचाखच भरे हुए हैं।
मेडिकल कॉलेज में स्थिति यह है कि मंगलवार को ही डायरिया से पीड़ित 15 बच्चों को भर्ती किया गया, जबकि पहले से ही 25 से अधिक बच्चे वार्ड में भर्ती थे। बेड की कमी के कारण स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी हर दिन 200 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार का कहना है कि डायरिया, तेज बुखार, झटके आना, पेट दर्द आदि लक्षण वाले बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। ओपीडी में हर दिन 100 से अधिक डायरिया के केस आ रहे हैं। दवा के साथ ही परिजनों को बचाव की जानकारी भी दी जा रही है।
डायरिया के लक्षण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार के अनुसार, डायरिया के मुख्य लक्षणों में पेट दर्द शामिल है, जो लगातार या छिटपुट हो सकता है। इसके अलावा अन्य लक्षणों में मितली, उल्टी, बुखार, धंसी हुई आंखें, पेशाब की कमी, सूखे डाइपर्स, धंसा हुआ तालू, बिना आंसू के रोना, सूखी श्लेष्मा झिल्ली, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, 102 डिग्री एफ से अधिक बुखार, सूखे होंठ और जीभ, खून भरा या काला मल, गंभीर उल्टी, त्वचा की लचक में कमी, और तेज दिल की धड़कन शामिल हैं।
बच्चों में इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और समय पर उचित इलाज कराएं। बच्चों की सेहत का ख्याल रखें और किसी भी लापरवाही से बचें।
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