शुक्रवार को जिलाधिकारी (डीएम) उमेश मिश्रा ने हाटा तहसील और सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों स्थानों पर अनेक कमियों का सामना करने के बाद डीएम ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। तहसील के आरके दफ्तर में खामियों की पहचान के बाद उन्होंने तहसीलदार को सख्त चेतावनी दी, वहीं सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही पर फटकार लगाई।

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न्यायालयों का निरीक्षण

दोपहर के समय, डीएम उमेश मिश्रा ने सबसे पहले तहसील स्थित न्यायालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि आरके दफ्तर में लगभग दो महीने पुराने आदेशों की फाइलें मालिकान रजिस्टर में दर्ज नहीं की गई थीं। इस संबंध में जब रजिस्ट्रार कानूनगो और तहसीलदार से जवाब मांगा गया, तो वे संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहे। इस पर डीएम ने रजिस्ट्रार कानूनगो को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया और तहसीलदार को चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के अंदर तहसील के सभी कार्यालयों की व्यवस्था ठीक नहीं की गई, तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।

सरकारी अस्पताल में निरीक्षण

इसके बाद, डीएम उमेश मिश्रा ने एसडीएम प्रभाकर सिंह के साथ मिलकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दौरा किया। सीएचसी में डीएम के पहुंचते ही वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। डीएम ने अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों से बातचीत की, जिसमें मरीजों ने शिकायत की कि उन्हें बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। इस पर डीएम ने चिकित्सा प्रभारी को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने महिला डॉक्टर से प्रसव की संख्या की जानकारी ली और पाया कि संस्थागत प्रसव की संख्या आधी से भी कम हो गई है।

मरीजों की शिकायतें और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही

जब डीएम ने महिला डॉक्टर से इसका कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि स्टाफ नर्सें मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रही हैं, जिससे मरीज सरकारी अस्पताल के बजाय बाहर इलाज करवाना पसंद कर रहे हैं। डीएम ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और सीएचसी प्रभारी डॉ. अमित गुप्ता को कड़ी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी गईं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता

डीएम उमेश मिश्रा ने तहसील और अस्पताल दोनों स्थानों पर पाई गई कमियों के आधार पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सरकारी तंत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने कहा कि तहसील और अस्पताल के सभी अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करना होगा, अन्यथा सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जनता के हित में उठाए कदम

डीएम उमेश मिश्रा के इस निरीक्षण से यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासनिक ढांचे में सुधार की आवश्यकता है और जनता के हितों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। तहसील और अस्पताल में पाई गई खामियों को दूर करने के लिए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

निष्कर्ष

डीएम उमेश मिश्रा के इस निरीक्षण से यह साफ है कि प्रशासन में सुधार की दिशा में कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। तहसील और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जनता को उनके अधिकारों और सुविधाओं में कोई कमी न हो और सरकारी सेवाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके।

इस निरीक्षण के बाद यह उम्मीद की जा सकती है कि तहसील और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होगा और आम जनता को बेहतर सेवाएं प्राप्त होंगी। डीएम उमेश मिश्रा का यह कदम निश्चित रूप से प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


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